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Wellhealth Ayurvedic Health Tips: आला पावसाळा तब्येत सांभाळा, पावसाळ्यात अशी …


Wellhealth Ayurvedic Health Tips: देशाच्या अनेक भागांमध्ये पावसाने स्पष्टपणे हजेरी लावली आहे. गेल्या दोन-तीन दिवसांपासून महाराष्ट्रात पावसाचा जोर वाढला आहे. त्यामुळे नागरिकांना उष्णतेपासून काहीसा दिलासा मिळाला आहे. पावसाळा आला की थंडी वाढते आणि वातावरण अधिक आरामदायक बनते.

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परंतु या वातावरणा मध्ये संसर्ग आणि इतर रोगांचा धोका देखील लक्षणीय वाढला आहे. त्यामुळेच या काळात अतिसार, मलेरिया, विषाणूजन्य ताप, सर्दी, खोकला, घसा खवखवणे असे आजार मोठ्या प्रमाणात होतात. या दिवसांमध्ये विशेषत वृद्ध छोटे मुलं आणि तरुणांवर जास्त लक्ष दिले पाहिजे.

 

पावसाळ्यात,आपली रोगप्रतिकारक शक्ती सामान्यत तडजोड केली जाते. तुम्हाला निरोगी ठेवण्यासाठी आणि संसर्गापासून बचाव करण्यासाठी, आज आम्ही तुम्हाला काही महत्त्वपूर्ण सल्ला देणार आहोत.

Wellhealth Ayurvedic Health Tips अशी घ्या आरोग्याची काळजी

1. घर नीटनेटके ठेवा.

संसर्गास कारणीभूत असलेल्या अनेक प्रकारच्या विषाणू टाळण्यासाठी स्वच्छता राखणे आवश्यक आहे. अशा प्रकारे, संसर्ग टाळण्यासाठी, संपूर्ण पावसाळ्यात आपले घर स्वच्छ ठेवा. याव्यतिरिक्त, घरामध्ये बुरशी किंवा बुरशीची वाढ होऊ देऊ नका.

2. योग्य पौष्टिक आहार घ्या.

तुम्हाला अनेक प्रकारच्या आजारांपासून स्वतःला सुरक्षित ठेवायचे असेल तर तुमची रोगप्रतिकारक शक्ती वाढवणे आवश्यक आहे. अशा परिस्थितीत तुमची ऊर्जा रोगप्रतिकारक वाढवण्यासाठी तुम्ही पौष्टिक आहार घ्यावा. पौष्टिक आहार घेतल्याने शरीराला आजारांपासून बचाव करण्यासाठी मदत मिळते. म्हणून, पावसाळ्यात, आपल्या आहारात फळे, भाज्या, शेंगा आणि संपूर्ण धान्ये भरपूर खावे.

3. लसीकरण करावे.

पावसाळ्यात, तुम्ही फ्लू, न्यूमोनिया आणि टायफॉइड यांसारख्या सामान्य विषाणूजन्य संसर्गाविरूद्ध लसीकरण करू शकता. ज्येष्ठ नागरिक आणि तरुणांना लसीकरण करण्यास विसरू नका. याचा अर्थ असा की तुम्ही अनेक प्रकारच्या रोगांचा संसर्ग टाळू शकता आणि चांगले आरोग्य राखू शकता.

4. घराभोवती पाणी साचू देऊ नये.

पावसाळ्यात घराभोवती पावसाचे पाणी साचते. या साचलेल्या पाण्यात डेंग्यू आणि मलेरिया पसरवणारे डास वाढण्याची शक्यता असते. त्यामुळे पावसाळ्यात घराच्या आत किंवा बाहेर पाणी साचू देऊ नका.

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Savitri Rahandgle

June 12, 2024   

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Health Tips in Hindi: बरसात में ऐसे रखें अपनी सेहत …


Health Tips in Hindi: दोस्तों बदलते मौसम के साथ हमारे स्वास्थ्य में भी बहुत बदलाव होते है. बरसात के मौसम में हमारे शरीर को अतिरिक्त देखभाल की आवश्यकता होती है। इस बरसात के मौसम में त्वचा की एलर्जी, बुखार, सर्दी-जुकाम, मलेरिया, और डेंगू जैसे अन्य बीमारियाँ होने की सम्भावना होती है।

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इस बीच, कई लोग हवा पानी और बदलते वातावरण से कहीं बिमारियों के चपेट में आते है, भले ही अभी बारिश शुरू नहीं हुई है। अभी तक, देश के कुछ क्षेत्रों में मानसून आ चुका है और कुछ में बारिश का मौसम शुरू हो चुका है। बरसात साल का ये मौसम है, जब बहुत से लोग घूमने फिरने को बाहर जाते हैं। इस मौसम में खुले में खाना खाने का मजा ही कुछ और होता है। गर्मा गर्म खाने आनंद हर कोई लेना चाहता है. हालांकि, यह मौसम हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। बारिश के मौसम का सुहाना, गर्म और ठंडा मौसम कई बीमारियों को अपने साथ लेकर आता है। इसलिए, बररसट के मौसम में खाने पिने के साथ अपनी सेहत का भी ख्याल रखना बहुत जरुरी है. तो आइए जानते है बरसात में अपने स्वस्थ की देखभाल कैसे करे.

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Health Tips in Hindi: इम्यूनिटी बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ खाएं।

बरसात के मौसम में आपको अपने आहार में इम्युनिटी बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों को शामिल करना चाहिए। उदाहरण के लिए, अपने आहार में ब्रोकली, गाजर, हल्दी और अदरक जैसे खाद्य पदार्थ शामिल करें। लहसुन में जीवाणुरोधी गुण भी होते हैं जो बुखार, खांसी और जुकाम जैसे संक्रमणों को रोकने में मदद करते हैं।

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Health Tips in Hindi: अपनी त्वचा की देखभाल के लिए इसका इस्तेमाल करें:

बरसात के मौसम में, त्वचा की एलर्जी की समस्या सबसे ज्यादा होती है। इस स्थिति में, भीगने से बचने के लिए बारिश में बाहर टहलें, लेकिन यह भी सुनिश्चित करें कि आप अपने शरीर पर लंबे समय तक गीले कपड़े न छोड़ें क्योंकि इससे कई बीमारियाँ हो सकती हैं।

 

Health Tips in Hindi: पानी को गर्म करके पीए।

बरसात साल का ऐसा मौसम है जब पानी ज्यादा तर दूषित होता है. और दूषित पानी पीने से बीमारी हो सकती है। इसलिए, बारिश के मौसम में, डॉक्टर पानी को उबालकर और फ़िल्टर किया हुआ पानी पीने की सलाह देते हैं। दूषित पानी पिने से  डायरिया, पीलिया और उल्टी जैसी गंभीर बीमारियाँ हो सकती हैं।

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Rahul Bisen

June 12, 2024   

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Well Health Tips in Hindi Wellhealth: रात को सोते समय …


Well Health Tips in Hindi Wellhealth: दोस्तों रात को सोते वक्त बहुत सारे कोगों को अपने को तकिये के पास या तकिये के निचे रखने की आदत होती है. लेकिन ये आदत महंगी पड़ सकती है. तकिये के पास फ़ोन रखकर सोने से केलव मानसिक स्वास्थ पर नहीं तो, शारीरिक स्वास्थ पर भी दुष्परिणाम निर्माण होते है. अगर आप भी ऐसी गलती कर रहे है तो संभल जाए नहीं तो बहुत ज्यादा तकलीफ हो सकती है. फ़ोन तकिये के निचे रखकर सोने से क्या दुष्परिणाम होते है आइए जानते है.

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Well Health Tips in Hindi Wellhealth : सोते समय मोबाइल फ़ोन कितनी दूर रखना चाहिए?

आप जहां सो रहें हो वहां से दूर या दूसरी रुम में आपका फ़ोन रखें। आप एक और चीज कर सकते है, वो है आप जिस रुम में सो रहें है. उस रुम के दूसरे बाजु में आपका फ़ोन रखें। आप फोन टेबल पर भी रख सकते है. अगर आप आपके फोन को बेड पर रखकर सो रहें है तो उसका एरोप्लेन मोड ऑन रखे. इसे आपका ज्यादा नुकसान नहीं होगा।

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Well Health Tips in Hindi Wellhealth: तकिये के पास फोन रखकर सोने के ये 5 नुकसान 

1. स्ट्रेस: तकिये के पास फोन रखकर सोने से बहुत ज्यादा टेंशन आता है, स्ट्रेस निर्माण होता है. फोन से निकलने वाले रेडिएशन से ब्रेन मसल्स डैमेज होता है. 

2. एंग्जायटी : फोन से व्यक्ति स्ट्रेस और एंग्जायटी इसके साथी ही डिप्रेशन जैसे गंभीर रोगों का शिकार हो सकते है. इसलिए मानसिक स्वास्थ के अनेक समस्या निर्माण हो सकते है. इसलिए खुद को स्वस्थ रखने के लिए फ़ोन को दूर रखकर सोए. 

3. स्लिप क्वॉलिटी : आपका फोन एरोप्लेन मोड़ पर होने से, फ़ोन पर बार बार आनेवाले नोटिफिकेशन से आपके सोने की क्वॉलिटी मतलब स्लिप क्वॉलिटी ख़राब नहीं होगी। अच्छी नींद लेने के लिए फोन को तकिये पास न रखे.

4. सर्वाइकल : जब आप अपना फोन आपके तकिये पास रखकर सोते है, तब आपको सर्वाइकल कैंसर का खतरा होता है. 

5. मायग्रेन : फोन तकिये पास रखकर सोने से माइग्रेन की तकलीफ होती है. फोन का पुरे स्वास्थ दुष्परिणाम होता हैं. इसलिए अपने स्वास्थ का ठीक से ख्याल रखें। कुछ समस्या होने से डॉक्टर की राय जरूर ले.

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Tejal Goods Appliances

June 11, 2024   

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जामुन खाने के फायदे:


जामुन:

भारत को जम्बू द्वीप के नाम से भी जाना जाता है और यह नाम जामुन के वजह से है।आश्चर्य की बात तो है कि किसी फल के वजह से किसी देश का नामकरण किया गया !

दरअसल जामुन के कई नाम है और उन्हीं में से एक नाम है जम्बू । भारत में जामुन की बहुतायत रही है । हमारे देश में इसकी पेड़ों की संख्या लाखों-करोड़ों में है और शायद इसी कारण से यह फल हमारे देश का पहचान बन गया।

 

भारतीय माइथोलॉजी के दो प्रमुख केंद्र रामायण और महाभारत में भी यह विशेष पात्र रहा है।भगवान राम ने अपने 14 वर्ष के वनवास में मुख्य रूप से जामुन का ही सेवन किया था वहीं श्री कृष्णा के शरीर के रंग को ही जामुनी कहा गया है। संस्कृत के श्लोकों में अक्सर इस नाम का उच्चारण आता है।

 

जामुन विशुद्ध रूप से भारतीय फल है।भारत का हर गली - मोहल्ला ईसके स्वाद से परीचित हैं। जामुन एक मौसमी फल है। खाने में स्वादिष्ट होने के साथ ही इसके कई औषधीय गुण भी हैं। जामुन अम्लीय प्रकृति का फल है पर यह स्वाद में मीठा होता है। जामुन में भरपूर मात्रा में ग्लूकोज और फ्रुक्टोज पाया जाता है. जामुन में लगभग वे सभी जरूरी लवण पाए जाते हैं जिनकी शरीर को आवश्यकता होती है।

 

जामुन खाने के फायदे:

1. पाचन क्रिया के लिए जामुन बहुत फायदेमंद होता है. जामुन खाने से पेट से जुड़ी कई तरह की समस्याएं दूर हो जाती हैं.

 

2. मधुमेह के रोगियों के लिए जामुन एक रामबाण उपाय है. जामुन के बीज सुखाकर पीस लें. इस पाउडर को खाने से मधुमेह में काफी फायदा होता है.

 

3. मधुमेह के अलावा इसमें कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो कैंसर से बचाव में कारगर होते हैं. इसके अलावा पथरी की रोकथाम में भी जामुन खाना फायदेमंद होता है. इसके बीज को बारीक पीसकर पानी या दही के साथ लेना चाहिए.

 

4. अगर किसी को दस्त हो रहे जामुन को सेंधा नमक के साथ खाना फायदेमंद रहता है. खूनी दस्त होने पर भी जामुन के बीज बहुत फायदेमंद साबित होते हैं.

 

5. दांत और मसूड़ों से जुड़ी कई समस्याओं के समाधान में जामुन विशेषतौर पर फायदेमंद होता है. इसके बीज को पीस लीजिए. इससे मंजन करने से दांत और मसूड़े स्वस्थ रहते हैं.

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 जामुन मधुमेह के रोगियों के लिए रामबाण है। यह पाचनतंत्र को तंदुरुस्त रखता हैं । साथ ही दांत और मसूड़े के लिए बेहद फायदेमंद है ।

जामुन में कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, कैल्शियम, आयरन और पोटैशियम होता है।आयुर्वेद में जामुन को खाने के बाद खाने की सलाह दी जाती है। 

 

जामुन के लकड़ी का भी कोई जबाव नहीं है। एक बेहतरीन इमारती लकड़ी होने के साथ ईसके पानी मे टिके रहने की बाकमाल शक्ति है‌। अगर जामुन की मोटी लकड़ी का टुकडा पानी की टंकी में रख दे तो टंकी में शैवाल या हरी काई नहीं जमती सो टंकी को लम्बे समय तक साफ़ नहीं करना पड़ता |प्राचीन समय में जल स्रोतों के किनारे जामुन की बहुतायत होने की यही कारण था इसके पत्ते में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं जो कि पानी को हमेशा साफ रखते हैं। कुए के किनारे अक्सर जामुन के पेड़ लगाए जाते थे।

 

जामुन की एक खासियत है कि इसकी लकड़ी पानी में काफी समय

तक सड़ता नही है। जामुन की इस खुबी के कारण इसका इस्तेमाल नाव बनाने में बड़े पैमाने पर होता है।

जामुन औषधीय गुणों का भण्डार होने के साथ ही किसानो के लिए भी उतना ही अधिक आमदनी देने वाला फल है ।

 

  नदियों और नहरों के किनारे मिट्टी के क्षरण को रोकने के लिए जामुन का पेड़ काफी उपयोगी है। अभी तक व्यवसायिक तौर पर योजनाबद्ध तरीके से जामुन की खेती बहुत कम देखने को मिलती हैं। देश के अधिकांश हिस्से में अनियोजित तरीके से ही किसान इसकी खेती करते हैं।अधिकतर किसान जामुन के लाभदायक फल और बाजार के बारे में बहुत कम जानकारी रखते हैं, शायद इसी कारणवश वो जामुन की व्यवसायिक खेती से दूर हैं।जबकि सच्चाई यह है कि जामुन के फलों को अधिकतर लोग पसंद करते हैं और इसके फल को अच्छी कीमत में बेचा जाता है।

 

जामुन की खेती में लाभ की असीमित संभावनाएं हैं।इसका प्रयोग दवाओं को तैयार करने में किया जाता है, साथ ही जामुन से जेली, मुरब्बा जैसी खाद्य सामग्री तैयार की जाती है।

 

सबसे खास बात कि जामुन हम भारतीयों की पहचान रही है अतः इस वृक्ष के संरक्षण और संवर्धन में हम सभी को अपना योगदान देना चाहिए।


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Bharti Pokale

June 7, 2024   

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Moringa in hindi: आयुर्वेदानुसार शेवग्याच्या शेंगा 300 आजारांवर रामबाण उपाय, …


Moringa in hindi: मित्रांनो शेवग्याच्या शेंगा आणि पाने आयुर्वेदानुसार ३०० पेक्षा जास्त रोगांवर रामबाण उपाय ठरतात. तर मित्रांनो आज आपण जाणून घेणार आहोत शेवग्याच्या शेंगाचे फायदे. 

Moringa in hindi: मित्रांनो लोक जास्ती जास्त प्रोटीन मिळवण्यासाठी मांस, अंडी व दुधाचे सेवन करतात परंतु तुम्हाला आचार्य वाटेल कि, या सगळ्यांपेक्षा सगळ्यात जास्त प्रोटीन शेवग्याच्या शेंगाच्या भाजीतून मिळू शकते. या मध्ये भरपूर प्रमाणात protein, amino, beta, acid, keratin, calcium fiber, sodium carbohydrate, phosphorus, minerals आणि जिंकसारखे अनेक प्रकारचे फिनॉलिक असतात. आणि या शेवग्याच्या शेगांमध्ये Vitamin-A, Vitamin-B1, Vitamin-B2, Vitamin-B3, Vitamin-B4, Vitamin-B6, Vitamin-B9, and Vitamin-C. खूप जास्त प्रमाणात असतात. तर मित्रांनो शेवग्याच्या शेगांचं सेवन केल्याने आपल्या शरीराला काय काय मिळतात ते जाणून घेऊ.

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Drumstick Benefits : शेवग्याच्या शेगांचे फायदे

 

 1. हाय ब्लड प्रेशर High blood pressure Drumstick Benefits:

आजकाल खूप जास्त प्रमाणात लोकांना हाय ब्लड प्रेशरची समस्या आहे. अशातच ज्या लोकांना हाय ब्लड प्रेशरची समस्या असेल तर अशा लोकांनी शेवग्याच्या शेंगाची भाजी खायला पाहिजे कारण ते खूप फायदेशीर ठरू शकते.

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2. तरुण दिसाल Drumstick Benefits:

मोत्रांनो शेवग्याच्या शेगांमध्ये खूप जास्त प्रमाणात Vitamin-A असते. ज्याचा वापर खूप पूर्वीपासून सौंदर्यासाठी केला जाते. तर मित्रांनो तुम्ही या शेवग्याच्या शेगांचा आपल्या रोजच्या जेवणामध्ये समावेश कराल तर तुमच्यावर वाढत्या वयाची लक्षणे तुमच्या चेहऱ्यावर दिसणार नाही.

 

 

3. हाडं आणि दात होणार मजबूत Drumstick Benefits:

शेवग्याच्या शेगांमध्ये खूप जास्त प्रमाणात कॅल्शियम असते. ज्यामुळे तुमचे हाडे मजबूत होण्यास मदत होते. त्याच बरोबर दातही मजबूत होतात. आणि म्हणून छोट्या मुलांना शेवग्याच्या शेगांची भाजी देणे खूप फायदेशीर मानले जाते.

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4. लठ्ठपणा कमी करते Drumstick Benefits:

शरीराची वाढलेली चरबी आणि लठ्ठपणा कमी करण्यासाठी शेवग्याच्या शेगा खूप फायदेशीर मानले जाते. यामध्ये फॉस्फोरस खूप जास्त प्रमाणात असते. ज्या मुळे शरीरातील अतिरिक्त कॅलरी कमी करते आणि चरबी कमी करून लठ्ठपणा दूर करते.

 

 

5. शुगर ला ठेवतो नियंत्रित Drumstick Benefits:

शेवग्याच्या शेगांच्या सेवनाने शुगर नियंत्रित राहण्यास मदत मिळते. आणि मधुमेह नियंत्रणात असते. त्यासोबतच पित्ताशयाच्या कार्यामध्येही शेवग्याच्या शेगां खूप फायदेशीर ठरतात. म्हणून आपल्या शरीराचे कार्य आणि स्वास्थ सुधारते.

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6. इन्फेक्शन पासून बचाव करते Drumstick Benefits:

शेवग्याच्या पाना, फळा, फुलांमध्ये अँटी-बॅक्टेरिया तत्व असते. म्हणून अनेक प्रकारच्या इन्फेक्शन आणि आजारापासून आपला बचाव होतो. शेवग्याच्या शेगांमध्ये Vitamin-C खूप जास्त प्रमाणात असते म्हणून त्यामुळे आपली रोगप्रतिकारशक्ती वाढते.

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Savitri Rahandgle

June 5, 2024   

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Health Tips In Hindi : खाने के बाद होती है …


Health Tips In Hindi : असमय भोजन, व्यायाम की कमी, आहार में भारी भोजन का अधिक सेवन, खान-पान की बदली हुई आदतें पाचन संबंधी विकारों का कारण बन रही हैं। इससे एसिडिटी हो गई है और खाने के बाद डकार या सीने में जलन की शिकायत बढ़ गई है। इस समस्या से दूर रहने के लिए स्वस्थ जीवनशैली बहुत जरूरी हो गई है।

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 1. सीने में जलन का कारण क्या हैं?

हार्टबर्न आमतौर पर अन्नप्रणाली (गैस्ट्रिक रिफ्लक्स) में गैस्ट्रिक एसिड के पुनरुत्थान के कारण होता है। यह गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स रोग का एक प्रमुख लक्षण है।

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वसायुक्त, मसालेदार, कृत्रिम स्वाद वाले खाद्य पदार्थों से बचें। भोजन के बाद 3 से 4 घंटे सोना, अधिक शराब पीने से बचना चाहिए।

 

2. एसिडिटी के कारण क्या हैं?

खाने-पीने की गलत आदतें, तनाव, धूम्रपान, शराब पीना, व्यायाम की कमी और खराब जीवनशैली एसिडिटी का कारण बनती है। इसके अलावा जो लोग बहुत अधिक मांस खाते हैं, बहुत अधिक तैलीय और मसालेदार भोजन करते हैं, उन्हें भी एसिडिटी की समस्या हो सकती है।

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3. कैसे रखें ख्याल?

नागरिकों को वसायुक्त, मसालेदार भोजन से बचना चाहिए। भोजन के बाद 3-4 घंटे सोना चाहिए, भारी शराब पीने से बचना चाहिए, भोजन को अच्छी तरह से चबाना चाहिए, प्रचुर मात्रा में तरल पदार्थ के साथ भोजन करना चाहिए और बिना जल्दबाजी किए खाने के लिए पर्याप्त समय देना चाहिए।

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जो लोग हमेशा सीने में जलन से पीड़ित रहते हैं, उन्हें भोजन में स्वस्थ भोजन खाना चाहिए। नियमित भोजन में गाजर, मूली, चुकंदर खाना जरूरी है। इससे पाचन क्रिया अच्छी रहती है, खाना खाते समय पानी थोड़ा कम पीना चाहिए। तैलीय और मसालेदार भोजन इनसे बचना चाहिए, जिन लोगों को इन सब के बाद भी सीने में जलन और एसिडिटी कम नहीं होती है उन्हें इलाज के लिए किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

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खबरदार महाराष्ट्र

June 4, 2024   

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आरमोरी उपजिल्हा रुग्णालयात आमदार कृष्णाजी गजबे यांची कार्यकर्त्यांसमवेत घेतली आकस्मित …


आरमोरी:- आरमोरी उपजिल्हा रुग्णालयातील रुग्णांची भेट घेऊन आमदार कृष्णाजी गजबे यांनी मोठ्या आस्थेने विचारपूस केली  यादरम्यान रुग्णांनी त्यांना जाणवत असलेल्या समस्यांचा पाढा आमदारांसमोर वाचला असता आमदार गजबे यांनी संपूर्ण दवाखान्याची पाहणी करून येथील डॉक्टर व नर्स यांना बोलावून त्यांच्याशी चर्चा केली व त्या रुग्णांना होत असलेल्या अडिअडचणी निदर्शनास आणून दिल्या व थेट जिल्हा शल्यचिकित्सक यांना दूरध्वनीद्वारे संपर्क करून त्यांना रुग्णांची होणारी हेळसांड थांबवण्यासाठी सूचना दिल्या.* 

यावेळी आमदार कृष्णाजी गजबे, जिल्हा भाजपा सचिव नंदूजी पेट्टेवार, आरमोरी शहराचे माजी नगराध्यक्ष पवनजी नारनवरे, तालुका अध्यक्ष पंकजजी खरवडे, आरमोरी न.प.चे माजी नगरसेवक भारतजी बावनथडे,  भाजपा शहर तालुका अध्यक्ष विलासजी पारधी, सामाजिक कार्यकर्ते नंदूजी नाकतोडे, भाजपा सोशल मीडिया प्रमुख अमोलजी खेडकर,  मुकुलजी खेवले, थामेश्वर मैंद, सुरज कारकुरवार व आरमोरी उपजिल्हा रुग्णालयातील कर्मचारी वर्ग उपस्थित होते.*


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Vaingangavarta19

June 2, 2024   

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उन्हाच्या काहलीत थंडीचा आनंद घेण्याच्या नादात तरुणाचा पाण्यात बुडून मृत्यू


उन्हाच्या काहलीत थंडीचा आनंद घेण्याच्या नादात तरुणाचा पाण्यात बुडून मृत्यू


वनविभागाने खड्डा केल्यानंतर सुद्धा कुंपण न केल्याने युवकाचा अंत. नुकसान भरपाई देण्याची मागणी.


चंद्रपूर :-
दुर्गापूर येथील तनवीर शेख वय 19 वर्ष हा लालपेठ कॉलरी क्रमांक 2 मध्ये आपल्या मित्राला भेटण्यासाठी गेला असता त्या भागात वेकोली व वनविभागाच्या जागेत खोदलेल्या एका 40-30 चौरस फूट आराजी असलेल्या खड्ड्यात उष्णतेच्या तीव्रतेने थंडीचा आंनद घेण्यासाठी मित्रांसोबत पोहायला गेला असता त्यांचा बुडून दुर्दैवी मृत्यू झाला आहे. ही घटना दुपारी 1 ते 1.30 ची असून मृतदेह शोधण्यासाठी चंद्रपूर मनापाच्या रेस्क्यू ऑपरेशन करणाऱ्या बोटीच्या साहाय्याने तब्बल तीन तासानंतर मृतदेह हाती लागला. या घटनेने सर्वत्र शोक व्यक्त होतं आहे, मात्र एवढा मोठा खड्डा खोदताना वनविभागाने त्या खड्ड्याच्या सभोंवताला कुंपण घातले नसल्याने ही दुर्दैवी घटना घडली त्यामुळे वन विभागाकडून मृतक च्या कुटुंबियांना नुकसान भरपाई मिळाली पाहिजे अशी मागणी होतं आहे.

शहरातील लालपेठ कॉलरी नंबर दोन मध्ये खुली जागा असून तिथे वनविभागाने वृक्षारोपण कार्यक्रमाअंतर्गत जवळपास एक हेक्टर जागेवर झाडे लावण्याचे काम हातात घेऊन भूमिगत कोळसा खान बुजाविण्याच्या कार्यात रेती व माती जी टाकल्या जाते त्यात पाणी पण सोडल्या जाते ते पाणी साठवणूक करून त्या पाण्याच्या माध्यमातून झाडे जगविण्यासाठी मोठा खड्डा खोदला होता त्या खड्ड्यात पाणी असल्याने दुर्गापूर येथील काही युवक जे लालपेठ कॉलरी येथे आले होते त्यांना पोहण्याचा मोह झाला आणि त्यांनी पाण्यात उडया मारल्या दरम्यान काही युवक बाहेर आले पण एक युवक तनवीर शेख हा खड्ड्यात बुडाला आणि त्यातच त्यांचा अंत झाला, या घटनेने परिसरात हळहळ व्यक्त होतं आहे


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Sanket dhoke

May 25, 2024   

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Health News :- लोकांची आरोग्याची चिंता वाढली, सर्वांचा कल लाकडी …


Health News : शहरवासीयांकडून त्याची मागणी वाढत आहे.

तंदुरुस्तीबद्दल वाढलेली जागरूकता, लाकडाच्या डाग तेलाकडे कल

Chandrapur : पारंपारिक उद्योगांपैकी एक असलेल्या लाकूड कचरा तेल उद्योगाला पुन्हा चांगले दिवस दिसू लागले आहेत. शुद्ध तेलाच्या वापरामुळे मध्ययुगात उद्योग जवळजवळ नष्ट झाला; पण वाढत्या प्रदूषित डिजिटल युगात अनेक लोक रसायनमुक्त, सेंद्रिय पद्धतीने उत्पादित तेल वापरण्यास प्राधान्य देत आहेत. त्यामुळे ग्रामीण आणि शहरी भागातील लाकूडतोड्यांना पुन्हा अच्छे दिन येणार आहेत. हे तेल आरोग्य चांगले ठेवण्यासही मदत करते.

पूर्वी तेल काढण्याचे क्षेत्र ग्रामीण भागात होते. अनेक व्यावसायिकांनी त्यांच्या हाताखाली काम करणाऱ्या मजुरांच्या हाताला काम दिले. बहुतांश शेतकरी शेतात उगवणारी ज्वारी, सूर्यफूल, शेंगदाणे, तीळ यांच्या बिया घेऊन त्यांचे तेल गोळा करतात.

 याशिवाय सरकी, कार्डी स्ट्रॉ यांचा पशुखाद्य म्हणून वापर केला जात असे, तसेच रसायनमुक्त तेलाचाही वापर केला जात असे. दरम्यान, रिफाइंड तेलाच्या वापराने धंदा ठप्प झाला; परंतु आरोग्याच्या अनेक समस्यांमुळे शेतकरी पुन्हा तेलबियाकडे वळत असून स्वत:साठी व कुटुंबासाठी शुद्ध खाद्यतेल उपलब्ध करून देत आहेत. त्यामुळे ज्वारी, सूर्यफूल, भुईमूग ही पिके मोठ्या प्रमाणात घेतली जात आहेत. त्यामुळे लाकूड टाकाऊ तेलाचे प्रमाणही वाढत आहे.


तेलामध्ये नैसर्गिक सार, पोषक घटक असतात


गेल्या काही दिवसांमध्ये, लाकूड तेल त्याच्या नैसर्गिक सुगंधामुळे आणि आवश्यक पोषक घटकांच्या उत्कृष्ट सामग्रीमुळे ग्राहकांमध्ये लोकप्रिय होत आहे. रिफाइंड तेलाच्या तुलनेत कच्च्या तेलाची वाढती मागणी हा फिटनेस जागरूकतेचा एक नवीन ट्रेंड म्हणून उदयास येत आहे.


अनेकांसाठी काम मिळवण्याची सांधी 


लाकडाच्या कचऱ्यावर तेलात प्रक्रिया करण्यासाठी भुसा पिकवण्यापासून ते तेल काढण्यापर्यंत विविध स्तरांवर श्रम करावे लागतात. त्यामुळे परिसरातील कामगारांना पुन्हा रोजगार उपलब्ध झाला आहे.


अधिक मागनी 
सध्या बाजारात लाकूड टाकाऊ तेलाला चांगली मागणी आहे. भुईमूग, सूर्यफूल, करडई, तीळ, मोहरी, जवस इत्यादी तेलबियांचे तेल लाकडाच्या लगद्यापासून काढले जाते. भाजी तोडण्यापासून ते शिजवण्यापर्यंत सर्व गोष्टींसाठी खाद्यतेल आवश्यक असते. खाद्यतेल आणि आरोग्य यांचा खोलवर संबंध आहे. त्यामुळे आहारात कोणते खाद्यतेल वापरावे हेही महत्त्वाचे ठरते.


Chandrapur शहरात आठ ते दहा तेलघणी 


कच्च्या तेलाच्या वाढत्या मागणीमुळे Chandrapur शहरातील काही लोकांनी कच्चे तेल काढण्याचा व्यवसाय सुरू केला आहे. सध्या चंद्रपुरात आठ ते दहा गाळे असून या व्यापाऱ्यांकडून तेल खरेदीसाठी नागरिकांची मोठी गर्दी दिसून येत आहे.

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Vaingangavarta19

May 17, 2024   

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आठ महिन्याच्या गर्भवती महिलेची रुग्णवाहीकेतच झाली प्रसुती


आठ महिन्याच्या गर्भवती महिलेची रुग्णवाहीकेतच झाली प्रसुती 

 

कोरची :-
कोटगुल येथील प्राथमिक आरोग्य केंद्रामधून रेफर केलेल्या डिलीवरी च्या पेशंटला कोरची येथील ग्रामीण रुग्णालयात घेऊन येत असतांना बेतकाठी ते पांढरीगोटा च्या दरम्यान असलेल्या डोंगरावर, खाचखळगे असलेल्या रस्त्याने येत असतांना जशी 108 ची गाडी खड्यात गेली तशीच महीलेची रुग्णवाहिकेतच प्रसुती झाली. 

सविस्तर वृत्त असे आहे की, दि, १७ एप्रिल ला 11.30 च्या दरम्यान कोरची तालुक्यातील देऊळभट्टी ( पाटील टोला) येथील रहिवासी सौ. लता मुकेश कोरेटी (29) हिला प्रसुतीच्या वेदना सुरू झाल्या 8 महीन्याचा बाळ पोटात होता. त्यामुळे प्रसुतीला वेळ आहे म्हणून घरची लोक बिनधास्त होती. 
अचानक कळा आल्याने तिथून 2 किमी अंतरावर असलेल्या कोटगुल येथील प्राथमिक आरोग्य केंद्रात लागलीच घेऊन आले. 

तेथील डॉ. चौधरी आणि महिला डॉ. नाकाडे यांनी तपासणी केली आणि महीला रुग्णांना तात्काळ गडचिरोली च्या जिल्हा रुग्णालयात घेऊन जाण्यास सांगितले. रेफर स्लीप क्रमांक 1120 दि. 15/5/2024 वेळ दुपारी 1.00.
गडचिरोली ला पेशन्टला घेऊन जाण्यासाठी  108 क्रमांकाच्या  गाडीला बोलाविण्यात आले.गाडी सोबत महिला डॉक्टर किंवा नर्स किंवा आशा वर्कर राहणे अत्यंत आवश्यक असतांना डॉ. चौधरी आणि डॉ. नाकाडे यांनी कुणालाही सोबत पाठविले नाही. 

108 च्या गाडीत डॉ. आतीश सरकार होते. सोबत लताचा पती मुकेश, तिचे नातेवाईक गिरजा कोरेटी ( माजी सरपंच)  ईलेश्वरी नैताम होते. 

पेशन्टची अवस्था पाहता,कोटगुल वरून गडचिरोली ला पेशन्टला न नेता डॉ.सरकारने पेशन्टला कोरची येथील ग्रामीण रुग्णालयात आणण्याचे ठरविले. कारण कोटगुल ते गडचिरोली हा अंतर 140 किमी असून कोटगुल ते कोरची हा अंतर 25 किमी आहे.
कोटगुल वरून येत असतांना कोरची वरून 8 किमी अंतरावर, बेतकाठी ते पांढरीगोटा दरम्यान असलेल्या डोंगरावर जशी गाडी खड्यात गेली तशीच चालत्या गाडीतच बाईची डिलीवरी झाली. सोबत असलेल्या नातेवाईकांना शंका आली त्यामुळे त्यांनी गाडी थांबविली व बाईच्या पोटाला हात लावून तपासणी केली तेव्हा डिलीवरी झाली होती. बाळ बाईच्या साडीतच होता त्यामुळे त्यांना दिसला नाही. 

तिथे असलेले डॉ. सरकार यांनी प्राथमिक उपचार करून लगेच गाडी कोरची ला घेऊन आले. कोरची येथील
ग्रामीण रुग्णालयात बाळ व आईला भरती करण्यात आले. येथे बाळ व आई सुखरूप असून बाळ 8 महीन्याचे आहे व वजन 2.00 किलो आहे.नशीब बलवत्तर होते म्हणून पहिल्या खेपेतील बाळंत नार्मल झाले. परंतु आरोग्य विभागाच्या खेळखंडोबा मुळे बाळ व आई दोघांनाही धोका होता. 
गावात परीचारीका नियुक्त असूनसुद्धा कधीच उपलब्ध राहत नाही याला जबाबदार कोण असा प्रश्न उपस्थित होतो आहे


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Vaingangavarta19

May 15, 2024   

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अजून किती बळी घेतल्यानंतर गडचिरोली वनविभागाला येणार जाग


अजून किती बळी घेतल्यानंतर गडचिरोली वनविभागाला येणार जाग

अशोक खंडारे मुख्य संपादक वैनगंगा वार्ता १८
गडचिरोली:  जिल्ह्यातील ज़ंगलात स्वापदानांमुळे आजपर्यंत बरेचसे बळी गेले असुन वनविभागाच्या अधिकाऱ्यांची झोप उडाली नसल्याचे चित्र दिसत आहे कुरखेडा तालुक्यातील चारभट्टी येथील तेंदू पत्ता मजूर नतीराम तुळशीराम नरेटी हा इसम आज दिनांक १५ सकाळी 8.30 वाजता जंगलामध्ये तेंदुपत्ता तोडण्यासाठी गेला आणि तेंदूपत्ता संकलन करीत असताना अचानक जंगली डुकराने त्यांच्यावर हल्ला केला त्या हल्ल्यात वरील इसम गंभीर जखमी झाला असून त्याला 
उचारासाठी शासकीय रुग्णालयात दाखल करण्यात आले, दिनांक १३ मे रोजी झालेल्या आंबेशिवणी येथील पार्वता बालाजी पाल वय वर्षे ६४ यापूर्वी चार दिवसाअगोदर वाघाने हल्ला करून जागीच पडशा पाडला ,अहेरी तालुक्यात अशीच एका महिलेवर जंगलात तेंदुपत्ता संकलन करीत असताना रानटी डूक्कराने हल्ला करून तिला गंभीर जखमी केले आणि ती महिला आजही रुग्णालयात उपचार घेत आहे पुन्हा काल दिनांक १४ मे रोजी गडचिरोली तालुक्यातील सावरगाव येथे एका महिलेला तेंदू संकलन करीत असताना झुडपामध्ये दबा धरून बसलेल्या वाघाने अचानकपणे त्या महिलेवर हल्ला करून नरडीच्या घोट घेतला तद्वतच कुरखेडा तालुक्यातील घाटी (गांगोली) येथे तेंदूपत्त्याचा शिजन सुरू झाल्याने घाटी येथील तिनशे ते साडेतीनशे मजूर एकत्रितपणे गाव शेजारी असलेल्या जंगलात पहाटे तेंदूपत्ता संकलनासाठी गेले सदर मजूर तेंदूपत्ता संकलन करीत असताना अचानकपणे जंगली हत्तीने आक्रोश करीत त्या मजूरावर हमला केला तेव्हा सदर मजूर भितीच्या आकांताने आपला जीव वाचवण्यासाठी सैरावैरा पळून गेले मात्र इश्वर नामक मजूर एका झाडावर चढला तरीही रानटी हत्तीचा हैदोस कमी झाला नाही त्या हतींचा एवढा आक्रोश होता की मजूर चढलेल्या झाडाला खाली कोसळवले त्या झाडावर चढून बसलेला मजूर झाडासह खाली कोसळवला परंतु त्याचे नशीब बलवंत्तर म्हणून झाडासोबत खाली पडल्यानंतरही आपला जीव वाचवण्यासाठी उठून त्याने पळ काढला त्यामुळे तो स्वतःचा जीव वाचवू शकला लगेचच वनविभागाला देण्यात आली तेंव्हा वनविभागाचे अधिकारी व कर्मचारी गावात आले असता गावकऱ्यांनी घेराव घालून जर आमच्या जंगलात रानटी हत्ती आले होते तर आम्हाला गावामध्ये मुनारी का देण्यात आली नाही सर्वश्री जवाबदारी वनविभागाची आहे असा हेका गावकऱ्यांनी धरला होता गडचिरोली जिल्ह्यात तेंदूपत्ता सिझन सूरू झाल्यापासून जंगली स्वापदाचे हमले हे मनुष्य प्राण्यावर होत असून नाहक गोरगरीबांचे बळी जात आहेत तेव्हा तेंदूपत्ता संकलन हा सिजन गोरगरीब मजूरांसाठी पोटपाण्याची भाकर आहे अशा परिस्थितीत त्यांची भाकर हिरावल्या जात असेल तर वनविभागाचे काम काय  ? आणि गडचिरोली जिल्ह्यात एकमेव  अभयारण्य सोडता जिल्ह्यात एवढे मोठे स्वापद आले कुठून आणि वनविभागाने ते आणले असतील तर का माहिती दिली नाही असा  प्रश्न जनता करित आहे अजून वनविभाग गडचिरोली जिल्ह्यातील स्वापदामार्फत किती बळी घेतल्यानंतर लक्ष देणार असाही प्रश्न उपस्थित होत आहे


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Vaingangavarta19

May 13, 2024   

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सांस्कृतिक भवन परिसरात टाकाऊ कचऱ्याने सुटली दुर्गंधी


सांस्कृतिक भवन परिसरात टाकाऊ कचऱ्याने सुटली दुर्गंधी

परिसरातील नागरीकांचे आरोग्य धोक्यात,पिंकु बावणेचा आंदोलनाचा इशारा

 

 

अशोक खंडारे/मुख्य संपादक वैनगंगा वार्ता १९

देसाईगंज-
      शहराच्या नगर परिषद कार्यालयासमोरील जागेत नागरीकांच्या कराच्या उत्पन्नातुन कोट्यावधी रुपये खर्च करून सांस्कृतिक भवन बांधण्यात आले आहे.सदर सांस्कृतिक भवन शोभेची वस्तु बनल्याचे धक्कादायक वास्तव समोर येत असतांनाच परिसरात टाकलेल्या टाकाऊ कचऱ्याने दुर्गंधी सुटली असुन यामुळे परिसरातील नागरीकांचे आरोग्य धोक्यात आले आहे.ही गंभीर बाब लक्षात घेता नगर प्रशासनाने येथील टाकाऊ कचरा यथाशिघ्र उचलुन विल्हेवाट न लावल्यास नगर परिषद कार्यालयासमोर आंदोलन करण्याचा इशारा काँग्रेस कार्यकर्ते पिंकु बावणे यांनी प्रशासनाला दिला असल्याने नगर पालिका वर्तुळात एकच खळबळ माजली आहे.
      देसाईगंज शहरातील नागरिकांना सामाजिक, सांस्कृतिक तसेच धार्मिक कार्य सोपस्कार पार पाडता यावेत करीता शहराच्या सर्व्हे नं. २४/५ मध्ये ८ एकरात कोट्यावधी रुपये खर्च करून सांस्कृतिक भवन बांधण्यात आले आहे.या सांस्कृतिक भवनात विविध कार्यक्रमांचे आयोजनही करण्यात येत असते.कार्यक्रमाच्या अनुषंगाने जेवणाचे कार्यक्रमही आयोजित करण्यात येत असतात.मात्र अलिकडे हे सांस्कृतिक भवन शोभेची वस्तु ठरू लागले असुन परिसरात तयार करण्यात आलेला बगीचा देखील देखभाल दुरुस्ती अभावी नामशेष झाला आहे.
     दरम्यान कार्यक्रमानंतर उरलेला टाकाऊ कचरा उचलुन डंपिंग यार्ड मध्ये टाकण्यासाठी सफाई कामगार यंत्रणा कार्यरत असताना टाकाऊ कचरा सांस्कृतिक भवन परिसरातच टाकण्यात येत असल्याने कुजलेल्या कचऱ्याला दुर्गंधी सुटून उग्र वास लगतच्या परिसरात  पसरला आहे.हा वास इतका दुर्गंधीयुक्त आहे की यामुळे अनेकांना परिसरात वास्तव्य करणे कठिण होऊ लागले आहे.अनेकांना मळमळ, पोटाचे आजार अशा विविध समस्या जाणवू लागल्या आहेत.ही गंभीर वस्तुस्थिती लक्षात घेता नगर प्रशासनाने येथील कचऱ्याची यथाशिघ्र विल्हेवाट लावण्याची मागणी काँग्रेस कार्यकर्ते पिंकु बावणे यांनी केली असुन समस्या मार्गी लावण्यात न आल्यास नगर परिषद कार्यालयासमोर आंदोलन करण्याचा इशारा दिला आहे. याबाबत नगर प्रशासन काय कारवाई करते याकडे येथील नागरीकांचे लक्ष लागून आहे.


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Vaingangavarta19

May 10, 2024   

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तेंदूपत्ता गोळा करण्यासाठी गेलेल्या आषीशला वाघाने केले ठार


तेंदूपत्ता गोळा करण्यासाठी गेलेल्या आशिषला वाघाने केले ठार

 

प्रमोद झरकर उपसंपादक वैनगंगा वार्ता १९

मुल :-
तालुका अंतर्गत पदजारी -रत्नापूर जंगलामधील कक्ष क्र.३२४मध्ये गावातील चार ते पाच लोक तेंदूपत्ता संकलनाचे काम करण्यासाठी गेले असता झुडपात दबा धरून बसलेल्या वाघाने आशिष सुरेश सोनुले वय ३४ याचेवर हमला करुन ठार केले 
मुल तालुक्यातील जंगलव्याप्त ग्रामीण भागात उन्हाळ्यात काम नसल्याने मजूर तेंदूपत्ता संकलनासाठी जंगलात साठी जातात. रत्नपुरा पडझरी परीषदेचे काही सदस्य पहाटे गावाजवळील जंगलात तेदुपत्ता तोडणी साठी गेले होते. नेहमीप्रमाणे सर्वजण वेगवेगळ्या ठिकाणी पाने तोडत असताना झुडपात बसलेल्या पट्टेरी वाघाने आशिष सोनुले यांच्यावर हल्ला करून काही अंतरापर्यंत खेचत नेले. वाघाने आशिषवर हल्ला केल्याचे शेजारी उपस्थित असलेल्या मित्रांना समजताच  आरडाओरडा केल्याने वाघ जंगलात पळून गेला 

 आज घटनेची माहिती मिळताच ग्रामस्थांनी वनविभागाविरोधात संताप व्यक्त करत काँग्रेस नेते संतोषसिंह रावत यांच्या नेतृत्वाखाली वाघांच्या बंदोबस्ताची मागणी लावून धरली. आज वाघाच्या हल्ल्यात मृत्युमुखी पडलेल्या आशिष सुरेश सोनुले यांच्या कुटुंबात पत्नी, दोन मुली आणि एक मुलगा आहे.

घटनेची माहिती मिळताच वनपरिक्षेत्र अधिकारी कोरेकर यांच्या मार्गदर्शनाखाली परिक्षेत्र सहायक पकेवार, वनरक्षक एस.जी. पकडले, वनरक्षक ज्योती दावेवार यांनी तत्काळ घटनास्थळाचा पंचनामा करून मृताचा मृतदेह शवविच्छेदनासाठी उपजिल्हा रुग्णालयात हलवला. यावेळी उपस्थित ग्रामस्थांनी वनविभागाने मृताच्या कुटुंबीयांना तातडीने आर्थिक मदत देण्याची मागणी केली. त्यानंतर क्षेत्र सहाय्यक पकेवार यांनी मृताच्या पत्नीला 25 हजार रुपये देण्याचे आश्वासन दिले व शासकिय मदत मिळवून देण्यासाठी प्रयत्न केला जाईल असेही सांगितले


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Savitri Rahandgle

May 8, 2024   

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Kitchen Tips : प्लास्टिक चावल की पहचान करने के 4 …


Kitchen Tips: दोस्तों ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए बहुत सारे दुकानदार मिलावटी पदार्थ बेचते है. Plastic Rice घी, तेल, मसाले इसके साथ ही अनाज में भी मिलावट करते है. मिलावटी चीजें खाने से स्वास्थ को गंभीर नुकसान हो सकता है. Kitchen Tips जैसे जैसे चावल के दाम बढ़ रहे है, वैसे ही मिलावटी का प्रमाण बढ़ता जा रहा है. लेकिन प्लास्टिक के चावल Plastic Rice को आसानी से पहचाना नहीं जा सकता। रंग, महक और स्वाद आसपास बराबर होती है.

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लेकिन ये चावल खाने से अनेक बीमारियां हो रही है. इस धोखाधड़ी से बचने के लिए मिलावटी चावल को पहचान पाना बहुत जरुरी है. ऐसे समय में मिलावटी चावल पहचाने कैसे? मिलावटी चावल खाने से सच में स्वास्थ खराब होता है. इसलिए चावल खरीदने से पहले कोण कोनसी बाते याद रखनी चाहिए आइए देखते है.

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Kitchen Tips : ऐसे पहचाने प्लास्टिक राईस को Plastic Rice

1.पानी पर तैरना

चावल पकाने ने से पहले उसको पानी से धोते है. तब चावल पानी में डूबते है. और प्लास्टिक Plastic Rice के चावल पानी में तैरने लगते है. क्योंकि प्लास्टिक के चावल कभी भी पानी में डूबते नहीं है. इसलिए इस स्ट्रीक से आप बहुत ही ही आसानी से मिलावटी चावल को पहचान सकते है.

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2.चबाने से पता चलेगा

बाजार से चावल खरीद ने से पहले, पहले चावल के कुछ डेन चबा लीजिए। अगर वो अच्छी गुणवत्ता के होंगे तो आसानी से चबाए जाएंगे। लेकिन अगर उसमे मिलावट होगी तो वो दातों को कड़क लगेंगे। इस टिप्स के माध्यम से आप मिलावटी चावल आसानी से पहचान सकते है.

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3.चावल को भून लीजिए

चावल भून के भी हम कोनसे चावल मिलावटी है, और कोनसे नहीं ये पहचान सकते है. इसके लिए तवे पर कुछ चावल के दाने डालिए कम आंच पर भून लीजिए। अगर चावल से जलने की बू  आ रही होगी तो समझ लीजिए की ये चावल मिलावटी है.

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4.एक गाठ तैयार होगी

जब आप चावल पकाते है तब चावल दानेदार बनता है. बिलकुल भी चिपकता नहीं। और प्लास्टिक के चावल Plastic Rice चिपकता है. और उसकी गांठ तैयार होती है. ये टिप्स भी बहुत प्रभावशाली है.

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Savitri Rahandgle

May 7, 2024   

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wellhealth ayurvedic health tips : गर्मी में शरीर को ठंडा …


well health tips in hindi wellhealthorganic : दोस्तों गर्मी में स्वास्थ्य के मामले में अलग अलग समस्या होती है.और पेट की समस्या सबसे ज्यादा होती है. ऐसे में पेट को ठंडा रखना बहुत जरुरी होता है. इसलिए लोगो अलग अलग उपाय करते है. हम भी आज आपको दो खास उपाय बताने वाले है.

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wellhealth ayurvedic health tips : शरीर ठंडा रखने के आयुर्वेदिक उपाय 

wellhealth ayurvedic health tips : धनिया- जीरा पानी के फायदे

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1. पेट की जलन से रहत मिलेगी 
गर्मी में अगर आप रोज धनिया और जीरे का पीते है तो पेट में होने वाली जलन रहत मिलेगी। इन दोनों मसाले में रहने वाले एंटी ऑक्सीडेंट से शरीर की रोगप्रतिकारक शक्ति बढती है और उसके साथ ही शरीर के जहरीले पदार्थ बहार निकाल ने में मदत मिलती है. पेट ठंडा रहता है और आराम मिलता है. 

2. पेशाब में होने वाली जलन कम होगी 
गर्मी में बहुत सारे लोगों को पेशाब करते समय जलन सी होती है. इसका कारन अलग अलग हो सकते है. वैसे तो पेशाब करते समय जलन होती है तो डॉक्टर की राय लेनी चाहिए। लेकिन अगर घर में धनिया और जीरे का पानी पिए तो पेशाब करते समय होने वाली जलन काम हो सकती है. 

3. पित्त की समस्या दूर होगी 
जिन लोगों को पित्त की समस्या होगी उनका पित्त गर्मी में बढ़ सकता है. ऐसे में एसिडिटी, धब्बे और खुजली की समस्या हो सकती है. ऐसे में धनिया जीरे का पानी पिने से ये समस्या दूर हो सकती है.

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कैसे बनाए धनिया जीरे का पानी ?

धनिया और जीरे का पानी बनाने के लिए आप सबसे पहले एक चमच धनिया पावडर और एक चमच जीरा पावडर लीजिए। इसे एक ग्लास पानी में डालिए। इस पानी को थोड़े समय के लिए उपल ले और उसके बाद उसको छान लीजिए। और फिर इस पानी का सेवन करे. रोज सुबह इसका सेवन करने से आपको बहुत सारे फायदे मिलेंगे। ये उपाय करने से पहले एक बार डॉक्टर या आयुर्वेदिक एक्सपर्ट की राय लीजिए।

wellhealth ayurvedic health tips : गर्मी में शरीर को ठंडा रखने के लिए बेस्ट आयुर्वेदिक उपाय


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Gadchiroli Varta News

May 6, 2024   

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मंत्री धर्मराव बाबा आत्राम यांना विश्रांती घेण्याचा डॅाक्टरांचा सल्ला


मंत्री धर्मराव बाबा आत्राम यांना विश्रांती घेण्याचा डॅाक्टरांचा सल्ला

( बॅकपेनमुळे बेडरेस्ट, मुंबईत उपचार सुरू)

 

गडचिरोली - राज्याचे अन्न व औषध प्रशासन मंत्री धर्मराव बाबा आत्राम यांना पाठ व कंबर दुखापतीच्या आजारामुळे डॅाक्टरांनी विश्रांती घेण्याचा सल्ला दिला असून त्यांच्यावर मुंबईत उपचार सुरू आहे. त्यांनी विश्रांती न घेतल्यास त्यांच्यावर शस्रक्रिया करावी लागू शकते, असा ईशाराही डॅाक्टरांनी दिला आहे. 

सविस्तर असे की, मंत्री आत्राम यांना पाठ व कंबर दुखीचा आजार काही महिन्यापासून सुरू होता, मात्र त्यांनी या दुखापतीकडे दुर्लक्ष करून लोकसभेच्या निवडणुकीत महायुतीचे उमेदवार अशोक नेते यांच्या प्रचारात स्वतःला झोकून दिले होते. कंबरेला पट्टा बांधून ते संपूर्ण लोकसभा क्षेत्रात प्रचारासाठी फिरले, तब्येतीकडे त्यांचे झालेले दुर्लक्षच आता त्यांच्या दुखापतीसाठी कारणीभूत ठरले आहे. त्यामुळे डॅाक्टरांनी आता त्यांना विश्रांती घेण्यासाठी सांगीतले आहे. आज ते मुंबईहून गडचिरोलीला परत येणार होते मात्र त्यांना प्रवास करण्यासाठी सुद्धा डॅाक्टरांनी मनाई केल्याचे सांगीतल्या जात आहे.  

त्यांनी विश्रांती घेतल्यास ते लवकर बरे होतील असेही डॅाक्टरांनी म्हटले आहे. 

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